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न जाने कितने अनकही बातें हम साथ लेके जायेंगे

न जाने कितने अनकही बातें हम साथ लेके जायेंगे 
झूठ कहते है लोग 
की खाली हाथ आये थे खाली हाथ जाएंगे 

दोस्तों अगर हम अपनी जिंदंगी में झांक कर देखे तो पता चले की हम ने आज तक आपनो से कितनी ऎसे बातें कहनी होंगी  जिन का हमने आपनो से जिक्र ही न किया हो।  हर इंसान को यहाँ मालूम हैं की हम खाली हाथ आये थे और खाली हाथ जायेंगे फिर भी वो इंसान जिंदगी भर लगा रहता है दौलत कमाने ने।  आखीर में वही इंसान को जब वास्तवीक  परिस्थिती का अनुभव होता है तब वो उसकी दौलत तो नहीं लेके जा सकता लेकिन ऐसी  बहुत सी अनकही बातें होती है जो उस इंसान के साथ ही चली जाती है। आखिरी समय में वह इंसान मन की बातें तो बताना चाहता है लेकिन तब उसके बस में कुछ नहीं रहता।  या तो जिसको बताना चाहता है वही नहीं रहता या तो वह बात कहने में बहुत देर हो चुकी रहती। 

वो अनकही बातें कुछ भी हो सकती है।  जैसे की किसी को बताना हो की आप के लिए वो इंसान कितना जरुरी है।  या फिर आप उसको कितना चाहते हो।  या आप उसे रोकना चाहते हो।  उसीप्रकार हम माता पिता का  महत्व और अपने जीवन में उनका योगदान जानते है लेकिन कभी उनको बता नहीं पातें की वो हमरे लिए क्या मायने रखते है।  हम बता ही नहीं पातें अपने भाई को के उसका प्यार हमारे लिए क्या है।  या बहन को की वो दुनिया की सबसे अच्छी बहन है।  जिंदगी की भागदौड़ में हम अपने जीवन साथी तक को अच्छे हे नहीं बता पातें की उसकी हमारे जिंदगी क्या अहमियत है। उसको बता ही नहीं पातें की उस वक़्त वो सही था और हम गलत  या उसको अच्छे से समजाही नहीं पातें की हम किस प्रकार सही और वो इस बार थोड़ा कम सही है। कही बार तो सॉरी भी नहीं कह पातें। रोजाना ऐसी बहुत सी अनकही बातें भी जन्म लेती है जो हम बाद में भूल भी जातें है।  जैसे की बॉस, सीनियर, कलीग के काम की सरहाना करनी हो।

मुनीर नियाजी की एक ग़ज़ल है।  हमेशा देर कर देता हूँ में

जरुरी बात कहनी हो 
कोई वादा निभाना हो
उसे आवाज़ देनी हो
उसे वापस बुलाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं

मदद करनी हो उसकी
यार का धाढ़स बंधाना हो
बहुत देरीना रास्तों पर
किसी से मिलने जाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं

बदलते मौसमों की सैर में
दिल को लगाना हो
किसी को याद रखना हो
किसी को भूल जाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं

किसी को मौत से पहले
किसी ग़म से बचाना हो
हक़ीक़त और थी कुछ
उस को जा के ये बताना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं 

किसीसे भी मन की बात कह ने में  ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए। Burn DD (1981) न्यू यॉर्क फिलॉसोपर के मुताबिक ऐसे बहुत सी वजह हो सकती है जिनके चलते हमें कुछ बातें कहने में हमें संकोच होता है। उन में कुछ वजह यहाँ देखते है।

  • हम कही बार ये सोच कर कतराते है की कोई हमें इमोशनली वीक या इमोशनल फूल न समजे।  
  • हमें ऐसा लग सकता है की सामने वाला हमारा माइंड रीड करे  या फिर मानके चलते है की वो सब समज ते है। 
  • निराशावाद : आप की आपके पार्टनर से उम्मीद ही ख़तम हो जाती है की वो बदलेगा नहीं जैसा है वैसा ही चलता रहेगा।  
  • कही बार हम यह सोच कर किसी के काम की सरहाना नहीं कर पातें की कही हमें वो गलत न समज ले, जैसे की इसे प्रमोशन चाहिए होगा या फिर वो हमें पसंद करती या करता हो।  
  • प्यार का इजहार न कर पाने के पिछे भी बहुत से कारन हो सकते है जैसे की fear of rejection, fear of commitment or fear of appearing needy.
हमें अपने खुद के अंदर झांक कर पता करना चाहिए की हम किस वजह से अपनी मन की बात नहीं कर पातें और ज्यादा देर होने से पहले बात करनी चाहिए।

(निवेदन : हिंदी मेरी मातृभाषा नहीं है।  इसलिए लिखीत गलती के लीये क्षमस्व)


HARSHAL B. PATIL
emotionalhaunt@gmail.com


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टिप्पण्या

  1. 1No.Sir, Right Time is never Comes until we Won't try to execute, explain or Told our Feelings

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