मैं तो हू गोकुल का ग्वाला । तू है बिलकुल राधा जैसी। मैं सुरज के भोर सा है। तू चंदा की चॉंदी जैसी। मैं इन्द्रधनुष के रंगो सा। तू बरसाने की होली जैसी। मैं तो बगिया का माली हू। तू बगिया के फूलो जैसी। मैं तो झरने सा झारता हू। तू बहती है नदिया जैसी। मैं पथिक सा चलने वाला। तू चलती हिरनी जैसी। मैं तो यहॉं मुशफिर हू। तू है पथिक के साथी जैसी। मैं दरवाजे सा खुलता हू। तू खुलती है खिड़की जैसी। मैं हू मेहनत के हाथों वाला तु है हाथों की रेखा जैसी। मैं तो भँवरे सा उड़ता हू। तू इठलाय़े तितली जैसी। मैं धरती पर रहने वाला। तू है स्वरग अप्सरा जैसी। तू अपने दिल की भी सुनले। जीवन भर साथ निभाऊगां। तू मेरे दिल मे रहती है। तू है मेरी दुनियां जैसी। मैं तो हू गोकुल का ग्वाला । तू है बिलकुल राधा जैसी। - Dr. Raj Bahadur Singh...
नुकतीच महाविद्यालयांमधील स्नेहसंमेलने आटोपली , अशाच एका कार्यक्रमात आजच्या तरुणाईचा अगदी जवळून वेध घेता आला . फॅशन शो हे मोठं आकर्षण असत अशा कार्यक्रमांमध्ये आणि मुलांमध्येही मोठा उत्साह दिसतो . पहिल्याच फेरीत देखण्या तरुणांचा आणि सुंदर ललनांचा झोकात रॅम्प वॉक पार पडला . आता दुसरी फेरी पर्यवेक्षकांच्या प्रश्नोत्तरांची होती , मुलंही प्रश्नांची समर्पक उत्तरे देत होती , एकाला प्रश्न विचारला कि तुमचे आदर्श कोण ? त्याने क्षणाचाही विलंब न करता उत्तर दिले कि .... सर हे माझे आदर्श आहेत मी त्यांची प्रत्येक गोष्ट फॉलो करतो अगदी त्यांची वेशभूषा , केशभूषासुद्धा . आता हे संभाषण ऐकणारी मी मात्र गोंधळात पडले की अरे हे ..... सर कोण , आपण तर त्यांना ओळखत पण नाही जे आपल्या मुलांचे आदर्श आहेत . घरी गेल्यागेल्या आधी गुगल सर्च केलं त...
न जाने कितने अनकही बातें हम साथ लेके जायेंगे झूठ कहते है लोग की खाली हाथ आये थे खाली हाथ जाएंगे दोस्तों अगर हम अपनी जिंदंगी में झांक कर देखे तो पता चले की हम ने आज तक आपनो से कितनी ऎसे बातें कहनी होंगी जिन का हमने आपनो से जिक्र ही न किया हो। हर इंसान को यहाँ मालूम हैं की हम खाली हाथ आये थे और खाली हाथ जायेंगे फिर भी वो इंसान जिंदगी भर लगा रहता है दौलत कमाने ने। आखीर में वही इंसान को जब वास्तवीक परिस्थिती का अनुभव होता है तब वो उसकी दौलत तो नहीं लेके जा सकता लेकिन ऐसी बहुत सी अनकही बातें होती है जो उस इंसान के साथ ही चली जाती है। आखिरी समय में वह इंसान मन की बातें तो बताना चाहता है लेकिन तब उसके बस में कुछ नहीं रहता। या तो जिसको बताना चाहता है वही नहीं रहता या तो वह बात कहने में बहुत देर हो चुकी रहती। वो अनकही बातें कुछ भी हो सकती है। जैसे की किसी को बताना हो की आप के लिए वो इंसान कितना जरुरी है। या फिर आप उसको कितना चाहते हो।...
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