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तेरी प्रीत को मन तरसे है






तेरी प्रीत को मन तरसे है, अंखिया तरसे दर्शन को।


दिन कटता है तेरी राह में, रात तेरी शुधियों में।

सूने है यमुना के तीर, समझ भी जा अब मेरी पीर।

तेरी याद में अँखिया बरसे, मन सावन को तरसे।

वंशीधर, विशधर के स्वामी, आ जाओ गोकुल में।

तरस रही गोकुल की गलियां, धुल पॉव को तरसे।

होली में सूखी है सखिया, सूखा पचरंग चीर।

अंजुरी तरसे तेरी छुअंन को, तन बहो को तरसे।

तेरी प्रीत को मन तरसे है, अंखिया तरसे दर्शन को।



                      Assistant Professor
               NIT, Hamirpur


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